ألبوم:
لمّاح
كلمات أصلية
العربية
الترجمة
الهندية
لماح
समझदार
कैसे अपनी भावना बताऊँ तुम्हें एक शब्द बोले बिना!
हो तो तुम समझदार लेकिन एक बात नहीं समझे
मेरी हँसी और मुस्कुराहट से तुम्हारी कहीं ग़लतफ़हमी ना हो
क़सम से मेरा दिल तेरे बिना किसी के लिए नहीं
हज़ारों बार आया तेरे पास अपने एहसास को छुपाकर
उसी एहसास के साथ वापस आया और तुम्हें मैंने समझाया नहीं
और कितनी बार कहा कि "ठीक है, ज़रूरी नहीं है"
चाहे अपने इस इश्क़ को मैं इकट्ठा करूँ या फेंक दूँ
हज़ारों बार आया तेरे पास अपने एहसास को छुपाकर
उसी एहसास के साथ वापस आया और तुम्हें मैंने समझाया नहीं
और कितनी बार कहा कि "ठीक है, ज़रूरी नहीं है"
चाहे, चाहे अपने इस इश्क़ को मैं इकट्ठा करूँ या फेंक दूँ
हर रोज़ मैंने तुम्हें कितनी चिट्ठियाँ लिखीं!
और सबकुछ जो लिखा था मुझे मिटाया हुआ मिला
डर है कि कहीं इस आशिक़ को तुम अकेले ना छोड़ो
उसे दर्द पहुँचाओ जिसे उम्र-भर नहीं पहुँचाया
निभाऊँगा ये प्यार साथ खु़द के ही
और जिस राह पर चला हूँ उसपर कभी चैन नहीं मिला
पर जो आए ऐसा दिन जब तेरे हाथ हों मेरे हाथों में
तो रहेगा ना मुझमें एक भी राज़ जो खुलकर नहीं बताऊँगा
निभाऊँगा ये प्यार साथ खु़द के ही
और जिस राह पर चला हूँ उसपर कभी चैन नहीं मिला
पर जो आए ऐसा दिन जब तेरे हाथ हों मेरे हाथों में
तो रहेगा ना मुझमें एक भी राज़ जो खुलकर नहीं बताऊँगा
submitted on 6 يونيو 2025 - 21:52

Give a shoutout to rora1073





